जिला प्रशासन देहरादून ने एक बार फिर अपने त्वरित और संवेदनशील एक्शन से असहायों के जीवन में उम्मीद की किरण जगाई है। जिलाधिकारी सविन बंसल के हस्तक्षेप से विधवा शोभा रावत को 17 लाख रुपये के ऋण के बोझ से मुक्त कराया गया है। बैंक द्वारा प्रताड़ित किए जा रहे इस परिवार को अब राहत मिली है — आईसीआईसीआई बैंक ने स्वयं उनके घर जाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट सौंपा और संपत्ति के कागजात वापस लौटाए।
वर्ष 2024 में पति मनोज रावत की आकस्मिक मृत्यु के बाद शोभा रावत पर घर की पूरी जिम्मेदारी आ गई। शोभा का एक पुत्र है जो शत-प्रतिशत दिव्यांग है — न बोल सकता है, न चल सकता है। बेटी अभी पढ़ाई कर रही है। ऐसे में, घर चलाना और दोनों बच्चों की देखभाल करना ही एक बड़ा संघर्ष था, लेकिन ऊपर से बैंक द्वारा 17 लाख रुपये के बीमित ऋण की वसूली के लिए लगातार प्रताड़ना की जा रही थी।
विगत सप्ताह देर सायं, व्यथित शोभा अपने बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची और जिलाधिकारी सविन बंसल से न्याय की गुहार लगाई। जिलाधिकारी ने तत्काल एसडीएम (न्याय) कुमकुम जोशी को मामले की जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए।

पिछले 10 दिनों से एसडीएम कुमकुम जोशी निरंतर इस प्रकरण की फॉलोअप कर रही थीं। डीएम के सख्त निर्देशों के बाद बैंक को सोमवार तक नो ड्यूज जारी करने की समय-सीमा दी गई थी, अन्यथा बैंक शाखा की संपत्ति कुर्क कर नीलामी के निर्देश दिए गए थे।
प्रशासनिक सख्ती के बाद आखिरकार आईसीआईसीआई बैंक ने शोभा रावत के घर जाकर नो ड्यूज प्रमाण पत्र सौंपा और उनके घर के संपत्ति दस्तावेज लौटाए। ऋण बीमा की राशि से पहले ही बैंक को 13.20 लाख रुपये प्राप्त हो चुके थे, जबकि लगभग 5 लाख रुपये की शेष राशि को प्रशासनिक हस्तक्षेप से माफ करा दिया गया।
डीएम सविन बंसल के नेतृत्व में हाल के दिनों में शिक्षा, रोजगार, ऋणमाफी और संपत्ति वापसी जैसे कई मामलों में जिला प्रशासन ने जनसाधारण को न्याय दिलाया है।
इस फैसले ने न केवल शोभा रावत जैसे असहाय परिवार के जीवन में उजाला भर दिया, बल्कि जनता का प्रशासन और सरकार पर विश्वास भी मजबूत किया है।



