देहरादून।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने केंद्र सरकार की अग्निवीर भर्ती योजना पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि “अग्निवीर योजना एक प्रयोग है और इसे समय-समय पर समीक्षा के लिए खुला रहना चाहिए”।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और सशस्त्र बलों को आधुनिक, युवा और सक्षम बनाए रखने के लिए समय-समय पर नई नीतियां लानी पड़ती हैं। हालांकि, किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने के बाद उसके प्रभाव का मूल्यांकन करना भी उतना ही आवश्यक है।
क्या कहा RSS प्रमुख ने?
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि:
* अग्निवीर योजना को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखना चाहिए।
* यदि योजना में कहीं सुधार की आवश्यकता महसूस हो, तो सरकार को सुझावों के आधार पर बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।
* युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और सेना जैसे संस्थान युवाओं को न केवल रोजगार बल्कि अनुशासन और नेतृत्व क्षमता भी प्रदान करते हैं।
अग्निवीर योजना क्या है?
अग्निपथ योजना के तहत युवाओं को चार वर्ष के लिए सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर दिया जाता है। सेवा अवधि पूर्ण होने के बाद चयनित अग्निवीरों को स्थायी नियुक्ति भी मिल सकती है, जबकि अन्य युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के लिए प्रशिक्षित और सक्षम बनाया जाता है।
इस योजना को लेकर देशभर में विभिन्न मत सामने आते रहे हैं। कुछ वर्ग इसे सेना में युवा ऊर्जा लाने वाला कदम मानते हैं, तो कुछ ने इसकी अवधि और भविष्य की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
RSS प्रमुख के इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान संकेत देता है कि संगठन नीति के व्यावहारिक पक्षों पर भी खुलकर विचार-विमर्श के पक्ष में है।
देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक और नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।



