देहरादून। उत्तराखंड के उच्च भूकंपीय संवेदनशीलता वाले क्षेत्र में आने के मद्देनज़र राज्य सरकार भवन निर्माण नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन की तैयारी कर रही है। विशेषज्ञों की ताज़ा रिपोर्ट और भूकंप जोखिम के आकलन के बाद सरकार ने निर्माण मानकों को और अधिक सख्त एवं वैज्ञानिक बनाने का निर्णय लिया है।
राज्य का अधिकांश भूभाग भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील श्रेणी में आता है। ऐसे में भवनों की संरचनात्मक मजबूती, ऊंचाई सीमा, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और नक्शा पास करने की प्रक्रिया में बदलाव प्रस्तावित किए जा रहे हैं। नए संशोधनों के तहत बहुमंजिला इमारतों, व्यावसायिक परिसरों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विशेष तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, संशोधित नियमों में भूकंपरोधी डिजाइन को अनिवार्य किया जाएगा। निर्माण से पहले भू-तकनीकी जांच और संरचनात्मक स्थिरता प्रमाणन को भी सख्ती से लागू करने की तैयारी है। इसके अलावा, नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए जा सकते हैं ताकि नियमों का उल्लंघन न हो।
सरकार का मानना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण कार्यों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को अद्यतन करना समय की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निर्माण नियम वैज्ञानिक आधार पर लागू किए जाएं तो भूकंप जैसी आपदा में जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
प्रस्तावित संशोधनों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और शहरी नियोजन से जुड़े अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
राज्य में भवन निर्माण नियमों में यह संभावित बदलाव आपदा प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में सुरक्षित और टिकाऊ ढांचागत विकास की आधारशिला साबित हो सकता है।



