चमोली। उत्तराखंड के चमोली जनपद में जंगलों में आग लगने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण वन क्षेत्रों में आग तेजी से फैल रही है। दिनभर धधकते जंगलों से उठता धुआं आसपास के गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीणों को सांस लेने में दिक्कत और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कई स्थानों पर आग सुबह से लेकर देर शाम तक सुलगती रही। आग की लपटों ने चीड़ और अन्य पेड़ों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वन संपदा को भारी क्षति पहुंच रही है। वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और तेज हवाओं के कारण राहत कार्यों में कठिनाई आ रही है।
इस बीच, कई गांवों की महिलाएं भी जंगलों में पहुंचकर टहनियों और हरी डालियों की मदद से आग बुझाने में जुटी नजर आईं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो यह रिहायशी क्षेत्रों और कृषि भूमि के लिए भी खतरा बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में आग लगने की घटनाएं हर वर्ष गर्मियों में बढ़ जाती हैं, लेकिन इस बार घटनाओं की संख्या अधिक दिखाई दे रही है। पर्यावरणविदों ने अपील की है कि लोग जंगलों में जलती बीड़ी-सिगरेट या अन्य ज्वलनशील सामग्री न फेंकें और किसी भी स्थान पर आग दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें।
प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। साथ ही, आग पर नियंत्रण पाने के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात करने की बात कही गई है।
जंगलों की यह आग न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी गहरा असर डाल रही है। जरूरत है सामूहिक प्रयास और जागरूकता की, ताकि इस प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सके।



