उत्तरकाशी | 104वें दिन भी धरना जारी — सुरंग के अंदर-बाहर कचरे का अंबार, प्रशासन पर उठे सवाल
उत्तरकाशी में कचरा निस्तारण की गंभीर समस्या को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना आज 104वें दिन में प्रवेश कर गया है। गोपीनाथ सिंह रावत के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब चौथे महीने में पहुंच चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
स्थिति अब चिंताजनक रूप ले चुकी है। जहां पहले केवल सुरंग के भीतर कचरा डाला जा रहा था, वहीं अब सुरंग के बाहर भी खुलेआम कचरे का ढेर लगाया जा रहा है। यह न केवल अव्यवस्था को दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक विफलता की भी स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।
104 दिन बीत जाने के बावजूद कचरे का समुचित निस्तारण नहीं हो पाया है और ट्रेंचिंग ग्राउंड के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक स्थानीय जनता इस बदइंतजामी का खामियाजा भुगतती रहेगी।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे गोपीनाथ सिंह रावत ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जनता के साथ सुनियोजित अन्याय है। एक ओर सफाई का दिखावा किया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर लगातार नया कचरा डाला जा रहा है। अब तो हालात यह हैं कि सुरंग के बाहर भी कचरे का अंबार लगाया जा रहा है, जो पूरी व्यवस्था की पोल खोलता है।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में समाधान चाहता, तो 104 दिन पर्याप्त थे, लेकिन अब नीयत पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। उनके अनुसार, समस्या को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है और जनता को गुमराह किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में भी इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि कचरा निस्तारण के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं, जबकि समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक कचरे के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, सुरंग के अंदर और बाहर कचरा डालना बंद नहीं किया जाता और ट्रेंचिंग ग्राउंड का निर्माण शुरू नहीं होता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
यह मामला अब केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। जनता की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।



